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"नहीं मैं वो अदा जो आशिक़ों की जान होती है, नहीं शम्मे हसीं जो महफिलों की शान होती है, मैं हूँ हालात पर लिखी हुई कोई ग़ज़ल गोया, 'हया' शामिल न हो तो शायरी बेजान होती है "

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" हया " उर्दू और हिंदी लिपि में
"Haya" in Urdu and Hindi print

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"गवारा ही नहीं मज़हब की चौखट पर मुझे जलना
कहीं बेहतर है इस से तो रहूँ मैं तीरगी बन कर
जलाना है तो अपने दिल का इक गोशा मुझे देदो
रहूँ जिसमें मोहब्बत की मुक़द्दस रौशनी बन कर"
~~~

 

"Gawara hi nahi mazhab kee chaukhat par mujhe jalna

Kahin behtar hai is se to rahun main teergee bankar

Jalaana hai to apne dil ka ik gosha mujhe de do

Rahun jis me mohabbat ki mukaddas raushni ban kar"



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